डूवर्स का सबसे छोटा आम बना आकर्षण का केंद्र, जायगांव में सड़क किनारे लगे पेड़ों पर लगते हैं स्वादिष्ट फल
आम का नाम सुनते ही लोगों के मन में मालदा, लंगड़ा, हापुस और अन्य प्रसिद्ध किस्मों की तस्वीर उभर आती है। लेकिन पश्चिम बंगाल के भारत-भूटान सीमा से सटे जायगांव क्षेत्र में एक ऐसी अनोखी आम की प्रजाति लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसे डूवर्स का सबसे छोटा आम कहा जाता है।
जायगांव के डांगागांव इलाकों में सड़क किनारे वर्षों पुराने पेड़ों पर लगता है यह आम
जायगांव के डांगागांव और आसपास के इलाकों में सड़क किनारे वर्षों पुराने पेड़ों पर लगने वाले ये आम आकार में मात्र एक से दो सेंटीमीटर तक के होते हैं। आकार में बेहद छोटे होने के बावजूद इनका स्वाद बड़े और प्रसिद्ध आमों को भी टक्कर देता है। यही कारण है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले लोग भी इन आमों का स्वाद लेने के लिए उत्सुक रहते हैं।
स्थानीय निवासी जयंत मुंद्रा ने बताया कि उनकी दुकान के पास स्थित एक प्राचीन आम के पेड़ पर हर वर्ष बड़ी मात्रा में छोटे-छोटे मीठे और स्वादिष्ट आम लगते हैं। उन्होंने कहा कि इन आमों का आकार भले ही छोटा हो, लेकिन इनका स्वाद बेहद लाजवाब होता है। पेड़ पर इतनी अधिक संख्या में फल लगते हैं कि लोग खाते-खाते थक जाते हैं।
उनके अनुसार, यह पेड़ कई वर्षों पुराना है और हर साल नियमित रूप से फल देता है। आम पकने के मौसम में स्थानीय लोग और राहगीर इन फलों का आनंद लेने के लिए पेड़ के आसपास पहुंचते हैं। देखने में आकर्षक और स्वाद में बेहतरीन होने के कारण यह आम क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हो चुका है।
हालांकि अभी तक इस विशेष आम की प्रजाति की आधिकारिक पहचान नहीं हो सकी है, लेकिन जायगांव और डूवर्स क्षेत्र में इसे सबसे छोटे आम के रूप में जाना जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि कृषि विशेषज्ञ इस पेड़ और इसकी प्रजाति पर शोध करें तो इसके बारे में और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
फिलहाल यह अनोखा छोटा आम जायगांव की एक विशेष पहचान बनता जा रहा है और आम प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
