बंगाल में सिर्फ छह माह में 60 हजार नाबालिग बनी मां, सरकारी अस्पतालों में हुई डिलेवरी
- राज्य सरकार बाल विवाह को लेकर सख्त कदम उठाने की कर रही तैयारी
- मुर्शिदाबाद छह महीने में यहां 12,847 अंडरएज डिलीवरी दर्ज
- सीएम ने कहा इतनी कम उम्र में शादी और गर्भावस्था के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा
सीमावर्ती मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में सामने आए आंकड़ों ने एक बार फिर बाल विवाह और नाबालिग गर्भधारण जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। जनवरी से जून 2026 के बीच राज्य में करीब 60 हजार ऐसी अस्पताल में हुई डिलीवरी दर्ज की गईं, जिनमें लड़कियों की उम्र 18 साल से कम थी। यानि छह महीने में औसतन हर दिन सैकड़ों नाबालिग लड़कियां अस्पतालों में बच्चे को जन्म देने पहुंचीं। सबसे ज्यादा मामले मुर्शिदाबाद से सामने आए हैं। यहां 12,847 अंडरएज डिलीवरी दर्ज की गईं। यह आंकड़ा पूरे राज्य में बताए गए मामलों का करीब पांचवां हिस्सा है। इसके बाद साउथ 24 परगना का नंबर है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा है कि इतनी कम उम्र में शादी और गर्भावस्था के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार अब इस पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।
बंगाल में पहले से बड़ी चुनौती: पश्चिम बंगाल में बाल विवाह लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। राज्य सरकार के दस्तावेज में एनएफएचएस-5 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 20 से 24 साल की उम्र की 41.6 फीसदी महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हुई थी। ऐसे में 2026 के पहले छह महीनों में सामने आए अस्पताल में हुई डिलीवरी के आंकड़े इस समस्या की तरफ फिर ध्यान खींचते हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को बाल विवाह की सीधी दर समझना सही नहीं होगा. असली तस्वीर के लिए जिले की आबादी, उम्र के हिसाब से गर्भधारण की दर और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टिंग पद्धति को भी देखना जरूरी होगा। फिलहाल इतना साफ है कि मुर्शिदाबाद समेत कई जिलों में सामने आए आंकड़ों ने सरकार के सामने एक गंभीर चुनौती जरूर खड़ी कर दी है।इन आंकड़ों ने सबसे ज्यादा चिंता इसलिए बढ़ाई है क्योंकि नाबालिग उम्र में गर्भावस्था सिर्फ शादी का मुद्दा नहीं है। यह बच्चों की सुरक्षा, पढ़ाई, स्वास्थ्य और भविष्य से भी जुड़ा मामला है। राज्य सरकार के मुताबिक, घर-घर जाकर ऐसे मामलों की पहचान करने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे। अगर किसी लड़की की उम्र कम पाई जाती है तो उसके मामले की जांच की जाएगी। सरकार ने नाबालिग लड़कियों के पति को नोटिस देने की बात भी कही है। उनसे उम्र से जुड़े दस्तावेज मांगे जाएंगे। बाल विवाह कराने या उसमें मदद करने वालों पर भी कानून के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के ये आंकड़े अस्पताल में हुई डिलीवरी के हैं। इन्हें सीधे राज्य में बाल विवाह या किशोर गर्भावस्था की कुल दर नहीं माना जा सकता। इस पूरे मामले में मुर्शिदाबाद का आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में है। छह महीने में यहां 12,847 अंडरएज डिलीवरी दर्ज हुईं। साउथ 24 परगना में 4,178 और पूर्व बर्धमान में 3,777 मामले सामने आए। मालदा और पश्चिम मेदिनीपुर भी उन जिलों में शामिल हैं जहां बड़ी संख्या में ऐसे मामले दर्ज हुए हैं। यानी मामला सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में नाबालिग उम्र में गर्भावस्था का मुद्दा प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। इन आंकड़ों को देखते समय एक बात समझना भी जरूरी है. किसी जिले में ज्यादा अस्पताल में हुई डिलीवरी दर्ज होने के कई कारण हो सकते हैं। आबादी, अस्पतालों तक पहुंच और रिकॉर्डिंग की व्यवस्था इसका हिस्सा हो सकती है। इसलिए इन आंकड़ों से सीधे यह निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होगा कि उसी जिले में बाल विवाह की दर भी उतनी ही ज्यादा है। लेकिन प्रशासन के लिए ये आंकड़े निश्चित तौर पर जांच का बड़ा संकेत हैं।सरकार अब घर-घर करेगी जांच: आंकड़ों के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने बाल विवाह और नाबालिग गर्भावस्था के खिलाफ अभियान तेज करने की बात कही है। घर-घर जाकर ऐसे मामलों की पहचान की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड से संदिग्ध मामलों की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद उनकी उम्र और परिस्थितियों की जांच की जाएगी। सरकार का फोकस सिर्फ शादी रोकने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पहले से हुए मामलों की भी पड़ताल की जाएगी।
नाबालिग लड़कियों के पति को नोटिस
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि नाबालिग उम्र में शादी के लिए जिम्मेदार लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा. सरकार की योजना के तहत नाबालिग लड़कियों के पति को नोटिस जारी कर उम्र से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं. अगर जांच में बाल विवाह की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की बात भी कही गई है।
मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा मामले: मुर्शिदाबाद में 12,847 अंडरएज अस्पताल में हुई डिलीवरी दर्ज हुई हैं. छह महीने के राज्य के कुल करीब 60 हजार मामलों में यह सबसे बड़ा हिस्सा है। साउथ 24 परगना 4,178 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर है। पूर्व बर्धमान में 3,777 मामले दर्ज हुए हैं. लंबे समय से बाल विवाह की समस्या से जुड़े आंकड़ों में भी मुर्शिदाबाद और कुछ अन्य जिलों को लेकर चिंता सामने आती रही है।
15 साल से कम उम्र की लड़कियों के मामले भी सामने आए: सबसे ज्यादा चिंता उन मामलों को लेकर है जिनमें लड़की की उम्र 15 साल से भी कम थी। दिए गए जिला आंकड़ों के मुताबिक मुर्शिदाबाद में ऐसे 253 मामले दर्ज हुए। रामपुरहाट में 86, मालदा में 81, पूर्व बर्धमान में 77 और उत्तर दिनाजपुर में 75 मामले सामने आए। पश्चिम मेदिनीपुर में 63 और साउथ 24 परगना में 59 मामले दर्ज हुए हैं। इतनी कम उम्र में गर्भावस्था का मामला बाल सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जाता है। ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी होता है कि इसके पीछे बाल विवाह था या किसी तरह का शोषण।

